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फारबिसगंज में ऑनलाइन सट्टेबाजों की गिरफ्तारी पर बड़ा सवाल,आखिर किस पुलिस पदाधिकारी के रहस्यमय चुप्पी पर चल रहा था वर्षों से यह अवैध गोरखधंधा ? असली किंगपिन पकड़ पाएंगे अररिया एसपी ?

प्रदीप कुमार साह की खास रिपोर्ट

सट्टेबाजी किंग को पकड़ पाएंगे एसपी ?
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फारबिसगंज के मुस्लिम बहुल इलाकों खासकर अम्बेडकर चौक ( विक्रान्ता हाल ) से लेकर दल्लू टोला वार्ड नं 18 के बीच एक नहीं सात – सात ऑनलाइन सट्टेबाजी के काउंटर किस पुलिस अधिकारी के शह पर वर्षों से धड़ल्ले से चलाए जा रहे थे ? कौन है इस सुसंगठित सट्टेबाजी गिरोह का असली किंग पिन ? लाख टके के इस सवाल का जबाब अगर अररिया एसपी चाहें तो गिरफ्तार चारों व्यक्ति क्रमशः मो सिकंदर , सरवर अली , मो छेदी और विशम्भर दास से कड़ाई से स्वयं एसपी पूछताछ करें तो संभव है । पर क्या ऐसा होगा ? इस लाख टके का सवाल दल्लू टोला व आसपास के लोगों के जेहन में अभी से हीं कौंधने लगा है ।जी हां उपरोक्त सवालों से लबरेज कई स्थानीय लोगों ने तो नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया की दल्लू टोला में सट्टेबाजी से कुछ घरों को छोड़ प्रायः घर की महिलाएं पिछले चार साल से घरेलू हिंसा की शिकार थीं । भला हो एसपी साहिबा का जिन्होंने इस लाइलाज बीमारी का इलाज करने की पहल की है ।
स्थानीय महिला व कई संभ्रांत लोगों ने इंडिया न्यूज लाइव को बताया की मरहूम यासीन के तबारक इस अवैध धंधे की शुरुआत दिल्ली के किसी परिचित के सहयोग से शुरू की। तबसे यह धंधा इतना परवान चढ़ा की रातोंरात अमीर बनने की चाह में ऑनलाइन सट्टेबाजी का धंधा इस बस्ती के लिए नासूर बनता चला गया । स्थानीय कम से कम एक दर्जन लोगों के नाम बताते हुए बताया गया की प्रतिदिन चार से पांच शिफ्ट में सट्टेबाजी के खेल की जानकारी स्थानीय पुलिस को भी वर्षो से थी , पर बंधी बंधाई रकम मिलने के कारण पुलिस इन गोरखधंधों के विरुद्ध कारवाई नहीं कर रही थी । हालांकि शनिवार की रात भी जो चार ऑनलाइन सट्टेबाज पकड़े गए हैं वे सभी छोटी मछली हैं । बड़ी मछली छापेमारी की भनक पाकर या फिर …………….? भाग निकले ।गिरफ्तार ऑनलाइन सट्टेबाजों के पास से पुलिस ने 18 हजार रुपये के सट्टा के टिकट , लॉटरी कोड और मोबाइल बरामद किए हैं । बरामद मोबाइल के भी अगर पुलिस ने कॉल डिटेल्स निकलवाकर गहन अनुसंधान करे तो ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह का देशभर में चल रहे बड़े रैकेट का आसानी से खुलासा हो सकता है ? बशर्ते जिला मुख्यालय के किसी तेज तर्रार और तकनीकी जानकार पुलिस अधिकारी को इस मामले में अनुसंधान का भार सौंपा जाय तब ,क्योंकि स्थानीय पुलिस इस मामले में मिलीभगत के चलते ठीक ढंग से उदभेदन करना नहीं चाहेगी । क्योंकि लूट में वर्षों से सभी एकजुट रहे ।

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