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बिहार:- पटना में भारी पड़ रहा है लापरवाही, चार महीने बाद मिले 359 केस .. 4 की मौत

पटना : कोरोना की दूसरी लहर में राजधानी पटना के लोगों को लापरवाही भारी पड़ सकती है। कोरोना की वापसी को देखते हुए राज्य सरकार ने 12 अप्रैल तक कई बंदिशें लागू की है लेकिन सबसे बड़ी चिंता राजधानी पटना में कोरोना के नए मामलों को देखकर हो रही है। पटना में एक बार फिर कोरोना मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। पटना में 4 महीने बाद कोरोना के 359 नए मरीज मिले। 4 मरीजों की मौत कोरोना वायरस से हुई। नवंबर महीने के बाद पहली बार पटना में कोरोना के इतने मरीज एक दिन में मिले हैं। 116 दिनों बाद पटना में मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा पाई गई है। 8 नवंबर को पटना में 306 जबकि 10 नवंबर को 304 मरीज पाए गए थे।

शनिवार को पटना में कोरोना की वजह से 4 लोगों की मौत हो गई। इनमें से तीन की मौत पीएमसीएच में जबकि एक की मौत पटना एम्स में हुई। पीएमसीएच में पटना की रहने वाली पूनम देवी छपरा की रहने वाली मीना देवी और गोपालगंज के रहने वाले मो आलम की मौत हो गई। जबकि एम्स में इलाज करा रहे हैं बिहटा के अभय कुमार की मौत भी शनिवार को हो गई। शनिवार को 5 महीने बाद बिहार में सबसे ज्यादा कोरोना के मरीज पाए गए हैं। बिहार में शनिवार को कुल 836 नए मरीज मिले। बिहटा के रहने वाले जिस मरीज अभय कुमार की मौत कोरोना से हुई है उसकी पत्नी और बेटी भी संक्रमित हैं। पटना के बाद सबसे ज्यादा केस सिवान में सामने आए हैं। सिवान में शनिवार को 80 नए मरीजों की पहचान हुई जबकि गया में 42 मुजफ्फरपुर में 30 नए मरीज मिले।

खास बात यह है कि राजधानी पटना में एक दिन में 60 बच्चे कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। ज्यादातर बच्चे शहरी इलाके के हैं जिन इलाकों में संक्रमित बच्चे पाए गए उनमें कंकड़बाग, पत्रकार नगर, कदमकुंआ, शास्त्रीनगर, गर्दनीबाग, फुलवारीशरीफ, बोरिंग रोड का इलाका शामिल है। पटना के कंकड़बाग स्थित तिवारी बेचर का इलाका कोरोना संक्रमण का नया हॉटस्पॉट बन गया है। तिवारी बेचर से सटे एक अपार्टमेंट में 13 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इसमें एक परिवार के ज्यादा लोगों के साथ-साथ पड़ोस में रहने वाले दूसरे फ्लैट के लोग भी संक्रमित।

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