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सीमावर्ती नप /निगम की चूक से कैंसर का खतरा,मेक इन इंडिया व स्वच्छता अभियान के दावों की खुल रही है पोल,प्रशासनिक लापरवाही से संविधान प्रदत्त अधिकारों के हनन का मामला !

प्रदीप कुमार साह की रिपोर्ट

भले हीं प्रधानमंत्री व देश भर के प्रशासनिक अमला जोरशोर मेक इन इंडिया ,स्वच्छता अभियानों के सफल होने का दावा करते हैं ।मगर इन सबके विपरीत सीमावर्ती फारबिसगंज सहित पूरे पूर्णियां प्रमंडलीय क्षेत्रान्तर्गत पड़ने वाली नप / निगम प्रशासनों की चूक के चलते कैंसर जैसी प्राणघातक रोगों को खुलेआम आमंत्रण मिलने लगा है।मामले की अनदेखी के कारण आम अवाम को संविधान में प्राप्त प्राण व दैहिक स्वतंत्रता अधिकारों का भी हनन हो रहा है।

बताते हैं कि इन दिनों फारबिसगंज नगर परिषद सहित सीमावर्ती पूर्णियां प्रमण्डल क्षेत्रान्तर्गत पड़ने वाली नप/ निगम क्षेत्रों के हाट बाजारों का विभिन्न स्तरों पर सरकारी राजस्व वसूली के उद्देश्य से डाक तो पूरी तन्मयता से करा ली जाती है।परंतु साफ सफाई के नाम पर ठेंगा दिखा दिया जाता है ।शुक्रवार को ताजा मंजर फारबिसगंज फैन्सी मार्केट में देखने को मिला जहां नारकीय जीवन जीने को अभिशप्त दुकानदारों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए नप प्रशासन पर गंभीर आरोप जड़े।

कमोबेश पूरे प्रमंडल में यही स्थिति है।
यहां यह भी बता दें कि इन क्षेत्रों में आम अवाम की माली हालत राष्ट्रीय औसत आय से काफी कम होने के कारण ,कम कीमतों के चक्कर में आंध्रप्रदेश से आने वाली मछली खाने पर ज्यादा जोर रहता है।वो भी नप /प्रशासन की उदासीनता के चलते गंदगी भरे हाट बाजारों से खरीदने की विवशता है।जिस कारण संक्रमण व संक्रामक रोगों के प्रसार का भय बना हुआ है।खास बात यह कि अभी हाल में हीं आंध्रप्रदेश व बंगाल से आने वाली मछलियों पर बिहार सरकार ने फॉर्मल आलड़िहाइड नामक जहरीले रासायनिक का प्रयोग अत्यधिक मात्रा में होने की लेबोरेटरी जांच रिपोर्ट के संदर्भ में कुछ दिनों के लिये प्रतिबंध भी लगाया था।कारण उक्त रसायन की अत्यधिक मात्रा में प्रयोग से कैंसर जैसी प्राणघातक रोगों का खतरा पैदा होता है।ऐसी गम्भीर व जानलेवा रोग से ग्रसित लोगों को काफी दिनों बाद हीं पता चलता है।पर कारण समझ में नहीं आ पाता है।वैसे भी नप अधिनियम के तहत मांस-मछली और आवासीय इलाकों में अवैध मुर्गा फार्म पर प्रतिबंध है।पर खासकर फारबिसगंज काली मेला स्थित काली मंदिर के इर्द -गिर्द नपकर्मियो के सांठगांठ के कारण ,यह गैरकानूनी धंधा शान से चल रहा है।जिस कारण वायु प्रदूषण व क्षयरोगों के प्रसार का खतरा बढ़ गया है।बावजूद न तो नप प्रशासन और न हीं सिविल सर्जन अररिया जनमानस के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील हैं।आवश्यकता है संविधान से प्राप्त मौलिक अधिकारों की रक्षा के प्रति सरकार व प्रशासन गंभीर हो अपने-अपने कर्तव्यों के निर्वहन की दिशा में ईमानदार व ठोस पहल करें ।

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