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लुंज-पुंज प्रशासनिक ब्यवस्था के कारण युवा पीढ़ी नशे के दल-दल में ,समाज के लिए चिंताजनक विषय

हरेन्द्र कुमार की विशेष रिपोर्ट

नशे के दल-दल में युवा पीढ़ी के पांव धंसते जा रहे हैं. इसमें युवाओं से कहीं अधिक संख्या है. जिस तरह इस दल-दल में युवाओं की फौज बड़ी होती जा रही है उससे यह बात समाज के लिए चिंताजनक हो गयी है. हालांकि इसके लिए अभिभावक भी कम दोषी नहीं हैं।किशोर नशे के लिए नये-नये तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं। थीनर, नशे की गोली, कोडीन युक्त सीरफ के अलावा अन्य उपलब्ध नशे का सामान इस्तेमाल कर रहे हैं. लुंज-पुंज चिकित्सा व्यवस्था के कारण इन बच्चों को ये ‘प्रतिबंधित’ दवायें सहजरूप में मिल जाती हैं।नियम को ताख पर रख बेची जा रही दवायें ।जानकारों की मानें तो नशा में  वाली दवायें एनआरएक्स ड्रग की श्रेणी में आते हैं. इन सभी दवाओं के क्रय-विक्रय की सूची दुकानदारों को रखनी है. ये सभी ड्रग चिकित्सक के पुज्रे पर ही बेचे जाने हैं. साथ ही चिकित्सक के पुज्रे का फोटो स्टेट कॉपी दुकानदार को नियमत: अपने पास रखना है । इन दवाओं के खरीद-बिक्री की पूरी सूचना संबंधित विभाग को मुहैया करानी है, लेकिन ऐसा होता नहीं. विभागीय सख्ती नहीं होने की वजह से कई दुकानदार अपने लाभ के लिए नई पीढ़ी को गलत रास्ते पर जाने से रोकने के बदले दवायें बेच देते हैं।वहीं ट्रैकोलाइजर ड्रग जैसे अल्प्राजोलम, डाइजीपाम आदि का भी उपयोग धड़ल्ले से नशा के लिए किया जाता है. कोडीनयुक्त कफ सीरफ का भी इस्तेमाल भी इसके लिए किया जाता है. यही वजह है कि कई कफ सीरफ मार्केट में आते ही हाथों-हाथ उड़ जाते हैं. दुकानदार भी इसका खूब लाभ उठाते हैं. निर्धारित कीमत से काफी अधिक दाम पर इन दवाओं को बेच मोटी रकम कमाते हैं।

विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है ना ही प्रशासनविभाग को सख्ती दिखानी होगी ।धड़ल्ले से नशे के लिए इस्तेमाल की जानेवाली इन दवाओं की बिक्री पर लगाम लगाने के लिए ड्रग विभाग को सख्त निगाह रखनी होगी. नियम को सख्ती से लागू करना होगा. शहर तथा इसके आस-पास के क्षेत्र में कुछ विक्रेताओं द्वारा खुलेआम ये दवाइयां बेची जा रही हैं।विभाग को ऐसे दुकानदारों पर नकेल कसने के लिए कड़ा रूख अपनाना होगा. साथ ही ग्रामीण इलाके में बिना लाइसेंस के दवा दुकान चलाने वालों पर कार्रवाई करनी होगी।नशे के दल-दल में धंसती जा रही नई पीढ़ी के लिए उनके अभिभावक भी कम जिम्मेवार नहीं हैं।उनके बच्चे कहां जा रहे हैं, क्या कर रहे हैं इस पर ध्यान नहीं देते. कामकाज में उलङो रहने के कारण बच्चों को पूरा समय भी नहीं दे पाते. उनकी संगत किन बच्चो के साथ है, वे घर के बाहर क्या करते हैं इन सब पर निगाह रखने की जरूरत है. बच्चों को पूरा समय देकर, उनसे बात कर इस दल-दल से समय रहते उन्हें निकाला जा सकता है. आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श भी लेनी चाहिए. इस समस्या से केवल वे ही नहीं जूझते जिनके बच्चे इसमें संलिप्त हैं. कारण नशे में डूबे किशोर वय के बच्चे आमजन को अपने व्यवहार से परेशान करते  हैं.।

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