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*बुझ गया चमकता सुदीक्षा नामक तारा*

अजय प्रताप सिंह

अनंत आकाश में निरंतर ऊंची उड़ान के हौसलों का पर्याय मानी जाने वाले सुदीक्षा महज 20 वर्ष की अल्पायु में रोते बिलखते परिजनों को छोडकर अनंत की यात्रा पर निकल गयी। सुदीक्षा की मौत के पीछे एक बिगडैल बाप के बुलेट सवार बेटे का सारे कायदे कानूनों को धता बताकर जोरदार तरीके से सुदीक्षा की बाइक को टक्कर मारने से सुदीक्षा ने मौके पर ही इस दुनिया से अंतिम सांस ले पायी।
सुदीक्षा को तडपता छोडकर यह बुलेट सवार मौके से फरार भी हो गया।
आपको बता दें कि सुदीक्षा को दो वर्ष पूर्व अमेरिकन साइंस और स्पेश सेंटर से तीन वर्ष के लिये 3.80 करोड में स्कोलरशिप मंजूर हुई थी। सुदीक्षा 16 मार्च 2020 में कोरोना के वैश्विक कहर के बाद स्वदेश लौटी थी। आगामी 20 अगस्त को सुदीक्षा को अमेरिका की उड़ान रात साढे ग्यारह बजे दिल्ली एयरपोर्ट से पकडनी थी। रिस्तेदार ओं से एक वर्ष और दूर रहने की तडप सुदीक्षा को मौत के क्रूर जबडे तक खींचकर ले गयी।
सुदीक्षा की ख्याति पूरी गुर्जर बिरादरी में उसे आंख का तारा बनाती थी। सुदीक्षा बहुत व्यवहारिक थी। जिसकी बानगी उसने अमेरिका में रहती हुए भी पेश की। दरअसल 2019 में पत्रकारों और साहित्यकारों के प्रतिष्ठित आनलाइन आर्थर आफ द वीक और बाद में आर्थर आफ द इयर चुनाव में सुदीक्षा ने महान साहित्यकार और पत्रकार निक्की शर्मा के पक्ष में खुद भी और अपनी अमरिकी सहेलियों का वोट कराकर अपनी व्यवहारिकता का नजारा पेश किया। बता दें सुदीक्षा भारत जर्नलिस्ट कौंसिल के अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह की भतीजी थी।

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