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ठग दंपत्ति गिरोह को शर्तों के साथ उच्च न्यायालय पटना ने दी अग्रिम जमानत,अब पुलिस की असली परीक्षा शुरू,मामला रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर दो लाख के ठगी का !

प्रदीप कुमार साह की रिपोर्ट

माननीय उच्च न्यायालय पटना ने रेलवे में टीईटी की नौकरी दिलाने के नाम पर फारबिसगंज के एक युवक संजय कुमार साह (पान दुकानदार) से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते बनाकर इसके आड़ में एक कलयुगी मामा के सहयोग से बड़ी हीं नाटकीय ढंग से करीब तीन साल की अवधि में चार अलग-अलग किस्तों में दो लाख रुपये की ठगी के चर्चित मामले में न्यायालय ने छह सप्ताह के भीतर सीजेएम अररिया के समक्ष हाजिर होकर नियमित जमानत करा लेने का निर्देश देते हुए सशर्त जमानत की आरोपी दंपत्ति की अग्रिम अर्जी स्वीकार कर ली है। उच्च न्यायालय पटना के विद्वान न्यायमूर्ति विकास जैन द्वारा निर्धारित शर्तों में कहा गया है कि जमानतदार नजदीकी रिश्तेदार होने चाहिये।जब तक मामले का माननीय न्यायालय में ट्रायल चलेगा इस प्रकार के मिलते-जुलते किसी अन्य मामलों में अब कोई और संलिप्तता नहीं होनी चाहिये । साथ हीं पुलिस अनुसंधान में सहयोग करेंगे ।ऐसा न होने पर जमानत रद्द करने का न्यायालय को अधिकार होने के साथ-साथ ट्रायल के दौरान सशरीर उपस्थित रहने और बिना किसी ठोस कारण के न्यायालय में सुनवाई के दौरान लगातार दो अनुपस्थिति पर जमानत न्यायालय रद्द कर सकेगी ।

इस आशय की जानकारी अपने अधिवक्ता से मिलने की बात पिड़ीत संजय ने सोमवार को सोशलमीडिया से साझा करते हुए कहा कि वह माननीय न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान करते हैं।
भाई-बहन के पवित्र संबंध बनाकर रिश्तों की आड़ में ठगी का दंश झेलने की बात कहते हुए आर एन दत्ता रोड ,फारबिसगंज(अररिया) निवासी पान दुकानदार संजय घर की माली स्थिति दयनीय होने एवं ठगे जाने की पूरी कहानी विस्तारपूर्वक बताने के दौरान कई बार रुआंसा भी हो गए।कहा कि अब तक पुलिस ने शायद मामले को गंभीरता से नहीं लिया है।

अररिया एसपी धूरत सायली पर उन्हें पूरा भरोसा है।इसलिये उन्होंने गत 29 जनवरी 2019 को अररिया जाकर एसपी महोदया के मंगलवार को लगने वाली नियमित जनता दरबार में न्याय की गुहार लगाते हुए फारबिसगंज पुलिस पर उनके मामला संख्या 848/18 में मामला दर्ज करने से लेकर अब तक पुलिस पदाधिकारी के अनुरूप अनुपम आचरण नहीं अपनानें और कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही की लिखित शिकायत जिला पुलिस कप्तान से की है।

इधर ठगी के शिकार शिक्षित युवक की वृद्ध माता ने भी अपनी बेवसी पर आठ – आठ आंसू बहाते हुए कहा कि गरीब को न्याय दिलाना ,भगवान की पूजा करने जैसा ही है।इसलिए पुलिस प्रशासन उनके परिजनों को इस मामले में त्वरित अनुसंधान कर न्यायालय में शीघ्र आरोप पत्र दाखिल कर दोषियों को सजा दिलाने में उनकी मदद कर आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करें ।
यहां बता दें कि सरकार व सुप्रीम कोर्ट भी सस्ता एवं सुलभ न्याय दिलाने की इच्छा से और प्रधानमंत्री के मजबूत इरादों के चलते देशभर में सक्रियता दिखा रही है ।पर अररिया जिला खासकर फारबिसगंज इस मामले में न जाने क्यों लगातार पिछड़ती जा रही है।डीजीपी बिहार को भी इस ओर गंभीरता से देखने की जरूरत है।गत रविवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए के सीकरी ने भी लॉएशिया की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहा कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया का प्रभाव फैसलों पर पड़ता है ।इसलिए भी आवश्यक है कि पीड़ितों को कानून के अनुरूप ठोस न्याय दिलवाने के लिए पुलिस को अपनी सक्रियता दिखानी चाहिए।ऐसा नहीं करने से हीं दशकों से पुलिस व्यवस्था पर से लोगों का विश्वास लगातार घट रहा है।इसलिए प्रायः देखा भी गया है कि पुलिसिया पचड़े में लोगबाग अब जल्द फंसना नहीं चाहती है?सरकार व विधि विशेषज्ञों को इस गंभीर विषय को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़कर आम रायशुमारी के साथ आत्ममंथन कर पुलिस मैनुअल में बदलाव करना अब वक्त की जरूरत बन गयी है।

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