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शिक्षा माफिया को बचाने में जुटा पूरा महकमा,कानूनी पेचिन्दगियों का लाभ उठाने की कवायद जारी, डीइओ अररिया ने माध्यमिक शिक्षा (बिहार ) पटना से मांगा मार्गदर्शन

प्रदीप कुमार साह की रिपोर्ट

शिक्षा माफिया को बचाने में जुटा पूरा महकमा,कानूनी पेचिन्दगियों का लाभ उठाने की कवायद जारी, डीइओ अररिया ने माध्यमिक शिक्षा (बिहार ) पटना से मांगा मार्गदर्शन ,मामला 11 रिक्तियों के विरुद्ध 24 पंचायत शिक्षकों के अवैध नियोजन का,2008 का नियोजन 10 वर्ष बाद 2018 में किया गया।
फारबिसगंज प्रखंड में 12 वर्षों से प्राचार्य पद की प्रोन्नति छोड़ नियमों के विपरीत अधिकारियों के कृपा से साधनसेवी के पद पर आसीन एक साधनसेवी ने द्वितीय चरण के पंचायत शिक्षकों के नियोजनों में बैक डेटिंग कर मेघावी अभ्यर्थियों के आवेदन को रोस्टर से हटाकर कम अंको वाले अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है।इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद इंडिया न्यूज लाइव में खबर चलने के साथ हीं अररिया जिला शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

इस मामले की सत्यता और आगे की कार्रवाई को जानने की बुद्धिजीवियों में उत्कंठा बढ़ गयी है। सोशल मीडिया में इस बावत ढेर सारे पोस्ट आये। कइयों ने भी और सबूत तथा जानकारी शेयर की एवं करने का वादा भी किया है। इसके बाद इस मामले में अब तक की गयी पड़ताल में इन तथ्यों का खुलासा हुआ है कि पंचायत स्तर पर 2008 के रिक्तियों के विरुद्ध किये गए आवेदनों में शामिल मेघावी अभ्यर्थियों को धत्ता बता कर पंचायत सचिव एवं मुखिया को प्रभाव में लेकर शिक्षा माफिया ने रोस्टर को बदल डाला है ।और फिर से अभ्यर्थियों के फर्जी कागजात तैयार किये तथा नया रोस्टर बैक डेटिंग कर तैयार किया है ।अररिया जिला शिक्षा विभाग तक के अधिकारियों को मलाई खिला कर करतूतों को दिया अंजाम देने में सफल हुए।अब जब मामला सुर्खियों में आया है तो डैमेज कंट्रोल में जिला शिक्षा विभाग का पूरा अमला एक बार फिर से जुट गया है ।

बताते हैं कि जिला शिक्षा पदाधिकारी अशोक मिश्रा ने इस मामले के संज्ञान में आने के बाद अपनी गर्दन बचाने के लिए जारी ज्ञापंक 667 दिनांक 20/7/17 तथा उसी के आलोक में फारबिसगंज के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मो इफ्तेखार अहमद कार्यालय से जारी ज्ञापंक 457 दिनांक 01/8/17 के 24 घंटे के भीतर कुशमाहा पंचायत के अबैध रूप से नियोजित शिक्षकों को हटाने के विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों एवं पंचायत सचिव के आदेश का आखिर किस दबाव में आठ माह से पालन नहीं किया गया है?इस मामले की पशुपालन घोटाले की भांति प्रारंभिक जांच के तर्ज पर कार्रवाई की जाय तो न केवल सीमावर्ती अररिया जिला वरण पंचायत स्तर पर हुए शुरुआती दोनो चरणों मे नियोजनों में पर्दे के पीछे से खेले गए काले खेल में अररिया जिले भर में अप्रशिक्षित अभ्यर्थियों में से करीब 200 पंचायत शिक्षकों का नियोजन,प्राईमरी रोस्टर तैयार करते वक्त किये जाने की बात सामने आए ,जो अखबारों की सुर्खियां बनी ।जिसमें करोड़ों-अरबों की काली कमाई हुए । जिसके मुख्य सूत्रधार फारबिसगंज के दशकों से प्रखंड साधनसेवी पद पर तैनात उच्च शिक्षा प्राप्त शहर के एक विद्यालय में पदस्थापित शिक्षक हैं ।जिसने शहर में करोड़ों की लागत से आलीशान मकान बना रखा है।दिखावे के लिए इस मकान को बनाने के लिये बैंक से दस लाख का कर्ज उठा रखा है।

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