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बिहार-बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को लेकर सोशल मंच पर उतरे हजारो लोग,हो रहा हैं ऐतिहासिक संवाद|सोशल मंच पर डीजीपी के विशिष्ट व्यक्तित्व और छवि को लेकर चल रहा है कैम्पेन|

       मुकेश कुमार सिंह,एडिटर इन चीफ      बिहार:- डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को लेकर सोशल मंच पर हो रहे हैं ऐतिहासिक संवाद|सोशल मंच पर डीजीपी के विशिष्ट व्यक्तित्व और छवि को लेकर चल रहा है कैम्पेन|

दिल्ली : यूँ तो खबरिया चैनल, अखबार, रेडियो और सोशल मीडिया पर देश के वीर सैनिक, विभिन्य तरह के सेलिब्रिटीज, राजनेता, खिलाड़ी और अनन्य विशिष्ट लोगों को लेकर ना केवल कई दिनों तक खबरों की सुर्खियों बनती है बल्कि उनके कृत्यों को लगातार इस तरह से परोसा जाता है कि लोग, चाहकर भी वर्षों बाद भी उसे भुला नहीं पाते हैं। लेकिन पहली बार सोशल मंच पर पुलिस के एक शीर्षस्थ अधिकारी के लिए बिहार सहित देश के विभिन्य प्रांतों में एक बड़ी मुहिम चल रही है। हजारों लोग, जिसमें आम लोग से लेकर, समाज के बेहतर छवि के लोग, पत्रकार, उद्यमी, विभिन्य विभागों के कर्मी और ओहदेदार, सेलिब्रिटीज और विभिन्य वर्ग, जाति, पंथ, सम्प्रदाय और धर्म के लोग शामिल हैं, फेसबुक पर बिहार के डीजीपी को लेकर तरह-तरह के कसीदे कढ़ रहे हैं। लोग अपने पोस्ट के जरिये बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को लेकर लिख रहे हैं कि वे बेहद शौम्य, शालीन, सभ्य, मृदुल, मिलनसार, अनुशासित और आम जनता के लिए प्रतिपल सुलभ डीजीपी हैं।

लोग लिख रहे हैं कि जहाँ देश के ज्यादातर डीएम, एसडीएम, बीडीओ, सीओ, एसपी, डीएसपी, थानेदार जैसे शुरुआती दौर के अधिकरी सरकारी मोबाइल नंबर पर भी फोन उठाने में अपनी तौहीन महसूस करते हैं, वहीं सहज, सुलभ और मददगार स्वभाव के होने के कारण बिहार के डीजीपी आईपीएस गुप्तेश्वर पांडेय किसी भी समय लोगों की मदद के लिए उपलब्ध रहते हैं। बीते दिनों सोसल मंच पर, डीजीपी से मुतल्लिक एक वीडियो वायरल किया गया है। जनाब, उस वायरल वीडियो की मंसा, उसके फोन करने की टाइमिंग ( सुबह के 3 बजे से चार बजे के बीच और बात भी वैसी जो डीजीपी से ताल्लुक ही नहीं रखती हो ) से ही साफ झलकती है । ऐसे में आज से करीब 7 महीने पहले की एक घटना याद आ गई । दिल्ली के एक सम्मानित और वरिष्ठ व्यक्ति के भाई के साथ बिहार में रात के करीब 10 बजे, रोड रौबरी हुई थी। दिल्ली से उस शख्स ने एसपी, आईजी को फोन किया, दोनो ने फोन नहीं उठाया । लेकिन जब उन्होंने डीजीपी को फोन लगाया, तो डीजीपी ने ना केवल फोन उठाया बल्कि उन्होंने तुरंत कारवाई भी करवाई। उस घटना का उद्द्भेदन हुआ और पीड़ित में साथ पूरा का पूरा न्याय हुआ। हमें याद है कि उक्त लूटकांड की घटना वाली खबर देश भर में, कई दिनों तक सुर्खियों में थी।

हालिया दिनों में ही बिहार के गोपालगंज में एक किशोर की हत्या के बाद, दंगा फैलाने की भरपूर कोशिश हो रही थी लेकिन डीजीपी ने खुद गोपालगंज पहुँचकर, उस मामले का पटाक्षेप किया और बिहार को जलने से बचाया। वाकई, यह तो बहुत बड़ी बात है कि किसी राज्य का डीजीपी रात के तीन बजे भी लोगों के फोन को उठा लेते हैं, इस उम्मीद में की शायद किसी को बड़ी आफत में उनकी मदद की जरूरत हो। देश भर में गुप्तेश्वर पांडेय से एक बार भी मिला या बात किया हुआ व्यक्ति उनकी सहजता और सुलभता का, निसन्देह कायल है। एक थानेदार को तीन बजे रात में फोन करके देखिए, अगर वह आपकी बुरी से बुरी गत ना कर दे तो कहिएगा। किसी की सहजता और सुलभता का नाजायज फायदा न उठाईए, वर्ना आज कल तो कई राज्यों से ठुकाई और कई तरह के केस की लगातार खबरें आ ही रही हैं। एक बार लगता था, सच में अन्याय हो रहा है । परन्तु, पैंतरेबाज और ब्लैकमेलर समाजिक स्तर को गिरा रहे हैं। बिहार में डीजीपी कर्तव्यहीनता को लेकर संविधान की धारा 311 के तहत कई पुलिस वालों को नौकरी से बर्खास्त भी कर चुके हैं। यह कारवाई जनता के हितों से खिलवाड़ की वजह से डीजीपी ने की है। बिहार में शराबबन्दी को सौ फीसदी सफल बनाने के लिए वे दृढ़ संकल्पित हैं। पीपुल्स फ्रेंडली पुलिस की उन्होंने नई ईबारत लिखी है।आमलोग बिहार के डीजीपी को जनता का डीजीपी समझते हैं। हम दावे के साथ और ताल ठोंककर कहते हैं कि अगर कोई मर्द है, तो वह रात्रि के 3 बजे महाराष्ट्र, गुजरात सहित किसी भी प्रदेश के डीजीपी से बात कर और अपनी व्यथा सुनाकर, अपनी समस्या का समाधान कर के दिखाएं। जाहिर तौर पर, गुप्तेश्वर पांडेय जैसे डीजीपी को, अंधेरे में रखकर और झांसे में लेकर, उनके साथ छल के साथ कोई भी उपक्रम करना, महापाप है।

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