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कोरोना काल में मिसाल : टूटती सांसों के बीच पटना के ऑक्सीजन मैन बने गौरव राय

कोरोना अपने चरम पर है दस में से सात आदमी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोरोना से ग्रसित है सबसे बड़ी समस्या आक्सीजन सैलैंडर को लेकर है।सरकारी व निजी हॉस्पिटल ने हाथ खड़े कर दिए हैं बाजार में ऊंची कीमतों में ऑक्सीजन सिलेंडर मिल रहे हैं ऐसे में जरूरतमंद लोगों को एक गुमनाम मसीहा गौरव राय नि:शूल्क ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करवा रहे हैं यह अभियान पिछले साल के लॉकडाउन से ही जारी है।पटना से उनका अभियान अब धीरे-धीरे जिलों तक फैलने लगा है ऐसे दौर में जब हौसला जवाब दे रहा है गौरव राय द्वारा किया जा रहा कार्य कहीं ना कहीं समाज को ऑक्सीजन तो जरूर प्रदान कर रहा है बाकी लोगों को भी उनके इस अभियान से जुड़ने की जरूरत है। पिछले साल भी कोरोना अपने चरम पर था सांसे थम रही थी हौसला टूट रहा था अपने मुंह मोड़ रहे थे पटना के अस्पतालों में मरीज को भर्ती करने से पहले नोटों के बंडल जमा किए जा रहे थे ऐसे दौर में टूटती सांसों की डोर थामने आगे आए गौरव राय।गौरव राय आज बिहार के लोगों के लिए ही नहीं पूरे देश के लोगों के लिए जाना पहचाना नाम बन चुके हैं बिहार के सिवान जिले के कोरिया माघर गांव निवासी गौरव राय जी पटना में कोरोना काल के दौरान एक ऐसे अभियान के प्रणेता बन बैठे जिसने हजारों जिंदगियों को तो बचाया ही साथ ही साथ लोगों को उनके अभियान से जुड़ने का हौसला भी दिया।बिना किसी सहयोग किसी संगठन के इन्होंने जब लोग ऑक्सीजन के अभाव में तिल तिल के मर रहे थे अपने पैसे से सिलेंडर का जुगाड़ किया और निशुल्क लोगों के घर-घर तक ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाना शुरू किया।जब यह खबर मीडिया में आई तब लोग इनके अभियान से जुड़ना शुरू हो गए कई सारे लोगों ने सिलेंडर दान भी किया जिसको जरूरत पड़ी उसने गौरव राय जी के से संपर्क किया निशुल्क उसे सिलेंडर मिला अभियान अभी भी जारी है। 50 वर्षीय गौरव राय को शहर के लोग ऑक्सीजन मैन के नाम से जानते हैं.गौरव राय को लोग ऑक्सीजन मैन क्यों कहते हैं इसके पीछे की वजह दरअसल यह है कि पिछले 5 महीनों से वह लगातार बिना किसी से पैसे लिए हुए मुफ्त में लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया करा रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि गौरव अब लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने का काम केवल पटना में ही नहीं बल्कि अब बिहार के 18 जिलों में शुरू कर दिया है.गौरव राय के ऑक्सीजन मैन बनने की कहानी ज्यादा पुरानी नहीं है. दरअसल, पांच महीने पहले इसी साल जुलाई में गौरव को भी कोविड-19 संक्रमण ने अपनी चपेट में ले लिया था. उनकी हालत गंभीर हुई तो उन्हें पटना के पीएमसीएच अस्पताल में भर्ती कराया गया और उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ी. अस्पताल में भर्ती गौरव राय को ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. कुछ दिनों में गौरव कोविड-19 संक्रमण से लड़कर ठीक हो गए मगर उसी दौरान उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर की अहमियत का एहसास हुआ.राय बताते हैं कि “14 जुलाई को मैं पीएमसीएच गया था और मेरी पत्नी को मेरे लिए ऑक्सीजन सिलेंडर प्राप्त करने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. इसी दौरान मैंने सोच लिया कि मैं अब लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करवाऊंगा.” कोरोना से जंग जीतने के बाद गौरव राय ने ठान लिया कि वह कोविड-19 मरीजों को मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करवाएंगे. गौरव राय रोजाना अपनी कार में एक दर्जन ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक घूमते रहते हैं और जैसे ही उन्हें जरूरतमंद लोगों का फोन आता है तो उसके घर पहुंचकर ऑक्सीजन सिलेंडर उन्हें उपलब्ध करवाते हैं।वह ज्यादातर ऐसे मरीजों की मदद करते हैं जो कोविड-19 से संक्रमित हैं और घर पर ही जिनका इलाज चल रहा है. राय बताते हैं कि उन्होंने इस काम को करने के लिए अपने घर से तकरीबन 2 लाख रुपए लगाए हैं और उनके इस काम से प्रभावित होकर अब कई अस्पताल और डॉक्टर भी उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर दान में दे रहे हैं ताकि वह लोगों की मदद कर सकें.पिछले 5 महीनों में गौरव राय ने 800 से ज्यादा लोगों की जान बचाई है. हालांकि, गौरव राय की मदद के बावजूद भी 14 लोगों की जिंदगी को नहीं बचाया जा सका है. बकौल गौरव, “मैं लोगों को मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया करवाता हूं और इसके लिए कोई पैसे नहीं लेता हूं. मैं लोगों के घर पर ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाता हूं और फिर वहां से उन्हें वापस भी ले कर आता हूं”. राय बताते हैं कि उनके नेक काम से प्रभावित होकर ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिल करने वाले लोग अब 300 प्रति सिलेंडर के बदले सिर्फ 100 में ही सिलेंडर रिफिल कर देते हैं.राय के पास आज कुल 251 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं जिनमें से 200 ऑक्सीजन सिलेंडर उनके काम से प्रभावित होकर बिहार फाउंडेशन ने उन्हें दान में दिए हैं. बाकी 51 ऑक्सीजन सिलेंडर राय ने अपने पूंजी से और दोस्तों की मदद से खरीदे हैं।

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