http://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js जिस 2जी घोटाले से सरकार पलट गई अब उसके सभी आरोपी बरी; कैग ने कहा था कि अगर स्पेक्ट्रम की नीलामी होती तो सरकार को 1 लाख 76 हजार करोड़ का फायदा होता – India News Live

जिस 2जी घोटाले से सरकार पलट गई अब उसके सभी आरोपी बरी; कैग ने कहा था कि अगर स्पेक्ट्रम की नीलामी होती तो सरकार को 1 लाख 76 हजार करोड़ का फायदा होता


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SP MITTAL.
21 दिसम्बर को दिल्ली स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज ओपी सैनी ने देश के बहुचर्चित टूजी स्पेक्ट्रम प्रकरण में पूर्व दूर संचार मंत्री ए राजा, डीएमके की सांसद कनिमोझी सहित सभी 21 आरोपियों को बरी कर दिया। 2 हजार पृष्ठों के फैसले में कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी सीबीआई रिश्वत की राशि के लेन-देन के कोई सबूत पेश नहीं किए; यह भी पता नहीं चला कि लाभार्थी कौन हैं। हालांकि सीबीआई की ओर से कैग की रिपोर्ट को आधार बनाया गया। लेकिन कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट का फैसला आते ही संसद से लेकर सड़क तक हंगामा हो गया। चैन्नई में डीएमके के कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया तो कपिल सिब्बल से लेकर पूर्व पीएम डाॅ. मनमोहन सिंह ने यूपीए सरकार को दूध का धुला बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सिब्बल ने तो नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ मीडिया पर भी हमला बोला। सिब्बल का कहना रहा कि टूजी के मामले को आगे रखकर मोदी प्रधानमंत्री बन गए। मैंने तब भी कहा था कि घोटाला नहीं हुआ है, लेकिन तब मीडिया ने भी मेरी बात को नहीं सुना। कोर्ट के ताजा फैसले पर अब कांग्रेस और डीएमके के नेता नरेन्द्र मोदी की सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

*…अगर नीलामी होती*

यह सही है कि टूजी स्पेक्ट्रम, कोयला आदि घोटालों की वजह से देश में कांग्रेस के गठबंधन वाली यूपीए सरकार को जाना पड़ा। भाजपा को पूर्ण बहुमत दिलवाने में भी इन घोटालों का सहयोग रहा। इसलिए अब यूपीए के दल कोर्ट के फैसले को ईमानदारी का सर्टीफिकेट मान रहे हैं, जबकि सब जानते हैं कि कैग की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही 122 कंपनियों के लाईसेंस निरस्त किए गए थे। कैग ने अपनी रिपोर्ट में भी कहा था कि यदि स्पेक्ट्रम की नीलामी होती तो सरकार को 1 लाख 76 हजार करोड़ का फायदा होता। लेकिन तब की यूपीए सरकार के दूर संचार मंत्री ए राजा ने पहले आओ, पहले पाओ की नीति में स्पेक्ट्रम बांट दिए। अब जब सस्ते स्पेक्ट्रम दिए हैं तो किसी को तो फायदा हुआ ही होगा। सब जानते हैं कि सस्ते स्पेक्ट्रम लेने के बाद भी कंपनियों ने दरों में कोई कमी नहीं की थी। आज तो मात्र चार सौ रुपए प्रति माह में अनलिमिटेड काॅलिंग और एक जीबी डेटा प्रतिदिन मिल रहा है। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि डीएमके से जुड़े नेता रातों रात किस प्रकार माला माल हो गए। यदि स्पेक्ट्रम आवंटन में बेईमानी नहीं होती तो सुप्रीम कोर्ट ने 122 कंपनियों का आवंटन निरस्त क्यों किया? दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने भी घोटाले से इंकार नही किया है। अब सीबीआई नए तथ्यों के आधार पर इस मामले को हाई कोर्ट ले जाएगी ၊

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