http://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js प्रजा द्वारा मुंबई के नगर निगम शिक्षा की परिस्थिति पर प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट चौंकाने वाले ; आरटीआई (सूचना का अधिकार) हाले बयां – India News Live

प्रजा द्वारा मुंबई के नगर निगम शिक्षा की परिस्थिति पर प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट चौंकाने वाले ; आरटीआई (सूचना का अधिकार) हाले बयां

वर्ष 2008-09 में पहली कक्षा में 63,392 बच्चों ने नामांकन कराया था, और यह संख्या 2016-17 में घटकर 32,218 रह गई

वर्ष 2017-18 के लिए मुंबई नगर निगम की ओर से प्रति छात्र 52,142 रुपये का आवंटन किया गया

सेमी- इंग्लिश विद्यालयों में स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या 8% है, जो विद्यालय छोड़ने वाले छात्रों की कुल संख्या के समान है। दूसरी तरफ एमपीएस स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या 2% है, जो काफी कम है

केवल 8 पार्षदों ने शिक्षा पर 4 से अधिक प्रश्न पूछे हैं। 167 पार्षदों ने शिक्षा पर एक भी सवाल नहीं पूछा। स्कूल छोड़ने की दर पर (3) प्रश्न से अधिक प्रश्न स्कूलों के नामकरण (10) पर  पूछे गए
कमलेश ၊

मुंबई 12 दिसंबर, 2017: प्रजा ने मुंबई के नगर निगम शिक्षा की परस्थिती पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की, और आरटीआई (सूचना का अधिकार) के माध्यम से विभिन्न मानदंडों पर एकत्रित आँकड़ों को प्रस्तुत किया। इस रिपोर्ट के निष्कर्ष के आधार पर यह स्पष्ट है कि, वर्ष 2008-09 में नगर निगम स्कूलों में पहली कक्षा में 63,392 बच्चों ने नामांकन कराया था, और यह संख्या 2016-17 में घटकर 32,218 (49% की गिरावट) हो गई है।

प्रजा फाउंडेशन के परियोजना निदेशक, श्री मिलिंद म्हस्के ने इस समस्या पर प्रकाश डालते हुए कहा, “नगर निगम स्कूलों में कक्षा 1 में नामांकन के आवधिक विश्लेषण से यह पता चलता है कि, अगर नामांकन में इसी प्रकार की गिरावट जारी रहे तो वर्ष 2020-21 तक एमसीजीएम स्कूलों में नामांकन कराने वाले छात्रों की संख्या केवल 16,275 रह जाएगी, जो वर्ष 2008-09 में 63,392 थी।”

नगर निगम विद्यालयों में स्कूल छोड़कर जाने वाले छात्रों का दर भी कुछ कम नहीं है, और वर्ष 2016-17 में नगरनिगम स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या 29,186 छात्रों (8%) थी। हालांकि, निगम ने सेमी- इंग्लिश विद्यालयों की व्यवस्था प्रारंभ करके स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर को कम करने का प्रयास किया है, फिर भी इसका वास्तविक प्रभाव अभी तक दिखाई नहीं दिया है क्योंकि वर्ष 2016-17 में इन विद्यालयों में भी स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर 8% है, जो काफी अधिक है। इसके बाद श्री म्हस्के ने शिक्षा के बजट एवं आरटीई अनुपालन के बीच परस्पर संबंध की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, “वर्ष 2016-17 में एमसीजीएम का प्रति छात्र व्यय 44,394 रुपये था, जबकि वर्ष 2017-18 में प्रति छात्र 52,142 रुपये का आवंटन किया गया था। इसके साथ-साथ, एमसीजीएम स्कूलों के आरटीई के अधिकांश आधारिक संरचना के नियमों को पूरा किया है एवं शाला सिद्धि शिक्षक मूल्यांकन मानदंडों के अनुरूप के बावजूद, 56% स्कूलों में शिक्षण गुणवत्ता का स्तर औसत दर्जे का है। हालांकि इस दिशा में काफी निवेश के बावजूद एमसीजीएम स्कूलों के छात्रों के परिणाम अच्छे नहीं रहे हैं।”

एमसीजीएम स्कूल के छात्रों के औसतन एसएससी में पास होने के प्रतिशत से इस बात की पुष्टि की जा सकती है। वर्ष 2016-17 में एमसीजीएम स्कूलों के 69% छात्र उत्तीर्ण हुए, जबकि निजी विद्यालयों के 92% प्रतिशत उत्तीर्ण हुए। माध्यमिक विद्यालय छात्रवृत्ति परीक्षा (कक्षा 5) में भी असमानता की यही प्रवृत्ति दिखाई देती है — छात्रवृत्ति की परीक्षा में भाग लेने वाले कुल छात्रों में से एमसीजीएम के केवल 1.6% छात्रों ने छात्रवृत्ति प्राप्त की, जबकि निजी विद्यालयों के छात्रों के लिए यह आंकड़ा 11.8% है।

प्रजा फाउंडेशन की ओर से वार्षिक घरेलू सर्वेक्षण हेतु नियुक्त अनुसंधान संस्थान, हंसा रिसर्च के सर्वेक्षण में पाया गया कि नगर निगम विद्यालयों में छात्रों के परिणाम निरंतर खराब के कारण माता-पिता में असंतोष दिखाई दिया है। हंसा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, श्री अंजन घोष ने कहा, “48% उत्तरदाता नगर निगम विद्यालयों से नाखुश थे, जिन्होंने खराब सुविधाओं को इसका सबसे बड़ा कारण माना, साथ ही 46% उत्तरदाताओं ने बताया कि एमसीजीएम स्कूलों में निम्नस्तरीय गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान की जाती है, जबकि 41% लोगों का मानना है कि नगर निगम विद्यालयों में पढ़ने के कारण उनके बच्चों को भविष्य में अपनी शैक्षणिक एवं व्यवसायिक संभावनाओं को बेहतर बनाने का अवसर नहीं मिल पाता है।”

रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए प्रजा फाउंडेशन के संस्थापक एवं प्रबंध न्यासी, श्री निताई मेहता ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों से प्रजा नगर निगम विद्यालयों की लगातार निगरानी कर रहा है। शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है। मुंबई पब्लिक स्कूल (एमपीएस) प्रणाली जैसे कुछ सकारात्मक कदम एमसीजीएम ने किये हैं, जिसका विस्तार और स्कूलों में किया जा सकता है।”

 

एमपीएस स्कूल, पूर्व-प्राथमिक से 10 वीं कक्षा तक ‘ बिना रुकावट’ शिक्षा प्रदान करते हैं। इन विद्यालयों में छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर वर्ष 2016-17 में 2% रही है, जो 8% की कुल दर से काफी कम है। एमसीजीएम की ओर से जारी किया गया परिपत्र भी एक अन्य सकारात्मक कदम है, जो छात्रों के परिणामों को शिक्षक के प्रदर्शन से जोड़ता है और इसके अनुसार छात्र के निम्नस्तरीय प्रदर्शन के लिए शिक्षकों पर जुर्माना लगाया जाएगा।

 

चर्चा को जारी रखते हुए श्री मेहता ने कहा, “प्रजा पिछले कुछ सालों से छात्रों के परिणामों को शिक्षक के प्रदर्शन से जोड़ने की वकालत कर रहा है। हालांकि, निगम के इस कदम से पहले यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि, शिक्षकों तथा विद्यालय के संचालकों (प्राचार्य/ प्रधानाध्यापक) को उनके विद्यालय एवं छात्रों के संदर्भ में आवश्यक प्रशिक्षण, अधिकार और क्षमता निर्माण तंत्र उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा, शिक्षा के समग्र प्रबंधन हेतु विद्यालय प्रबंधन समितियों (एस एम सी) का सशक्तिकरण भी आवश्यक है।”

इस रिपोर्ट को सारगर्भित करते हुए श्री मेहता ने कहा, “सुशासन उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और कार्यक्षमता के सिद्धांतों पर आधारित है। इसका मापन परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए, जो किए गए निवेश के अनुरूप हो।”

प्रजा फाउंडेशन के बारे में:

शासन में उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता को पुनः स्थापित करने के लक्ष्य के साथ वर्ष 1997 में प्रजा का गठन किया गया था। स्थानीय सरकार में जनता की घटती अभिरुचि की समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रजा नागरिकों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए प्रयासरत है, और इसलिए उन्हें ज्ञान के माध्यम से सशक्त बनाना चाहता है।

प्रजा का मानना ​​है कि, लोगों के जीवन को सरल बनाने और भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में जानकारी की उपलब्धता का अहम योगदान है। यह एक समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए सुशासन कायम करने की दिशा में निर्वाचित प्रतिनिधियों तक जनता के विचारों के पहुँचने को सुनिश्चित करना चाहता है। इसके साथ-साथ ऐसी युक्तियाँ और तंत्र भी अवश्य मौजूद होने चाहिए, जिसकी मदद से जनता अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किये गए कार्यों पर कड़ी नजर रखने में सक्षम हो सके। लोगों के जीवन को सरल बनाना, तथ्यों के माध्यम से जनता एवं सरकार को सशक्त करना तथा भारत की जनता के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए परिवर्तन की युक्तियों का निर्माण करना प्रजा के लक्ष्य रहे हैं। प्रजा लोगों की भागीदारी के माध्यम से एक जवाबदेह एवं कार्यक्षम समाज के निर्माण हेतु प्रतिबद्ध है ၊

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