http://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js फणीश्वरनाथ रेनू की साहित्यिक प्रतिभा 51 साल बाद पुनरीक्षण हुई। – India News Live

फणीश्वरनाथ रेनू की साहित्यिक प्रतिभा 51 साल बाद पुनरीक्षण हुई।

 

बासु भट्टाचार्य की तीसरी कसम के 51 साल बाद फणीश्वर नाथ रेणु की रचना पंचलैट 17 नवंबर को भारत में सिल्वर स्क्रीन पर प्रदर्शित होगी ।रेनू की दिल छूने वाली कहानियों ने हमेशा से फिल्म निर्माताओं के बीच जिज्ञाषा अर्जित की है ।लेकिन बासु भट्टाचार्य की तीसरी कसम के प्रदर्शन के बाद भी उनकी बहुत सारी प्रतिभा से लोग अनजान हैं ।पंचलैट एक मिट्टी के तेल के दीपक की कहानी है (जो पैराफिन और एक हाथ पंप का उपयोग करता है )जिससे दबाव बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है ।जिससे इसे प्रकाश में लाया जा सकता है जो कि ग्रामीणों के जीवन में एक अभिन्न हिस्सा है ,और एक सम्मान प्रदर्शित करती है और प्रतिष्ठित पंचायत को प्राप्त करती है ।जो कि इसके आगे बढ़ने वाली घटनाओं की संख्या में बहुत अधिक है। कहानी की रचना कई और विभिन्न स्तरीय सामाजिक परस्पर क्रियाओं पर आधारित है और प्रमुख पात्रों के बीच एक रोमांटिक रोमांस बना रहता है। इस फिल्म का निर्देशन प्रेम मोदी ने किया है। जो कि यह उनकी निर्देशन में दूसरी फिल्म है। पंचलैट के कलाकारों में बिजली घर के कलाकारों एस डी एस नाथ और थिएटर कलाकारों जैसे यशपाल शर्मा, राजेश शर्मा ,रविशंकर विजेंद्र काला ,ललित परिमू ,नारायण इकबाल सुल्तान मालिनी सेनगुप्ता कल्पना जो की अभी नागपाल की फिल्म दबंग, आरक्षण ,रंगरेज और रेट रेड (एक टीवी श्रृंखला थी )और अनुराधा एक प्रशिक्षित शास्त्रीय नर्तक और डेज ऑफ तफरी और लाइफ बिरयानी की अभिनेत्री तारकीय स्टार कलाकार के साथ साथ फिल्मों में विवृत दल के सदस्यों की सूची भी शामिल है ।फिल्म की रिलीज के बारे में बात करते हुए प्रेम मोदी ने कहा मैं हमेशा अपने अपने अगले प्रकल्प के लिए फणीश्वर नाथ रेणु की कहानियों को ध्यान मैं रखता था ।उनकी कहानियों में सादगी बेशुमार है और बंगाल में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है ।मेरा मानना है कि मैंने एक सर्वोत्तम साहित्य का अधिग्रहण किया है ।इसके अलावा मैं समूचा भारत जानता था और इस बार मेरे संचार का माध्यम हिंदी बन गया था ।पंचलैट की कहानी हमारे देश का बेहतर हिस्सा है ।और मुझे यकीन है कि देशभर में दर्शक इसे पसंद करेंगे ।वही अभिनेता यशपाल राणा ने कहा कि पंचलैट एक प्रकार का सिनेमा है ।जो जिंदगी में सिर्फ एक बार ही होता है और मुझे इस प्रकल्प का हिस्सा बनने में खुशी होती है। इस फिल्म का सबसे बड़ा सच यह है कि यह एक फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी पर आधारित है ।और हमने कथा के साथ-साथ प्रमाणिक रहते हुए इसे शुद्ध रूप से पेश किया है । मैं अब रिलीज की प्रतीक्षा कर रहा हूं

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