http://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js सुशील मोदी को क्यों लगता है कि उनके बिना बिहार में विकास का काम रुक गया था? – India News Live

सुशील मोदी को क्यों लगता है कि उनके बिना बिहार में विकास का काम रुक गया था?

 बिहार में जब से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई है, तब से उनके मंत्रिमंडल के कुछ सदस्य खासकर उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी इस बात का एहसास कराना नहीं भूलते कि उन लोगों के बिना राज्य के विकास के काम में ठहराव आ गया था. शायद ही ऐसा कोई सार्वजनिक कार्यक्रम हो या पार्टी प्रोग्राम जहां सुशील मोदी समेत नीतीश मंत्रिमंडल के मौजूदा भाजपा सदस्य इस बात का दावा नहीं करते कि उन लोगों के आने के बाद विकास वापस एजेंडे पर आ गया है. निश्चित रूप से नीतीश कुमार को ये बात अच्छी नहीं लगेगी, लेकिन गठबंधन में उनके विरोधी भी मानते हैं कि सरकार चलाने के लिए कई बार इस तरह के बयानों को नजरअंदाज करना पड़ता है.हालांकि सुशील मोदी ने मंगलवार को खुद इस बारे में पूछे जाने पर सफाई दी कि उनका कहने का यह मतलब नहीं कि राज्य में विकास का काम ठप था, बल्कि वह कहते हैं कि विकास ठहर गया था. सुशील मोदी खास तौर पर स्वास्थ्य विभाग का जिक्र करते हैं. उनका कहना है कि तेजप्रताप यादव ने इस विभाग की लुटिया डुबो दी. इससे पूर्व मोदी के बयानों पर चुटकी लेते हुए विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर निशाना साधा.

वहीं, जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि नीतीश कुमार का ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग है. विकास के काम या कानून का राज, इन दोनों प्रमुख मुद्दों पर उन्होंने कभी समझौता नहीं किया, इसलिए ये बहस बेमानी है. हालांकि यह भी सच हैं कि जीतन राम मांझी का शासन काल हो या आरजेडी के साथ महागठबंधन सरकार, नीतीश कुमार कभी सरकार चलाने के अपने मापदंड पर खुद को खरा नहीं मानते थे. लालू यादव खुद अपने बेटों का विभाग रिमोट कंट्रोल से चलाते थे.नीतीश के साथ उनके सामंजस्य का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकारियों के तबादले ना होने के कारण कई अफसर वर्षों से अपने पद पर रहने को मजबूर थे.

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