http://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js हाईकोर्ट की दीदी को फटकार,मोहर्रम के दिन भी होगा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन। – India News Live

हाईकोर्ट की दीदी को फटकार,मोहर्रम के दिन भी होगा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन।

जी पी सोनी की कलम से:-


21 सितम्बर को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हाईकोर्ट ने धर्म निरपेक्षता का पाठ पढ़ाया है। मोहर्रम और दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के विवाद पर हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि मोहर्रम के दिन भी रात 12 बजे तक दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन हो सकेगा। विसर्जन को लेकर सरकार ने अब तक जो भी आदेश निकाले उन सभी को हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। कोर्ट ने पुलिस से कहा कि वे मोहर्रम के जुलूस और दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के जुलूस केे रुट तय कर लें। दोनों समुदायों के बीच आपसी सद्भाव बना रहे यह भी सुनिश्चित किया जावे। कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी शासन की है। इससे पहले हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने सरकार से यह जानना चाहा कि जब सरकार हिन्दू और मुसलमानों में सद्भावना होने का दावा कर रही है तब 30 सितम्बर की रात और 1 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा विर्जन पर रोक क्यों लगाई गई है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अंतर्गत निर्वाचित सरकार को अधिकार मिले हुए हैं, लेकिन यह अधिकार असिमित नहीं है। सरकार ने मोहर्रम के जुलूस के मद्देनजर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर जो रोक लगाई है, वह भेदभाव पूर्ण है। जब संविधान में हर धर्म के व्यक्ति को समान अधिकार दिए गए हैं। तब एक धर्म के लोगों को अपनी धार्मिक भावनाएं व्यक्त करने से रोका नहीं जा सकता। सरकार ने बिना आधार के अपने अधिकारों का उपयोग कर प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगाई है।

क्या था ममता बनर्जी का फरमानः


पश्चिम बंगाल में 25 वर्ष पुरानी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार को उखाड़ कर ममता ने अपनी तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनाई है। ममता लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनी है। इतनी लोकप्रियता के बाद भी ममता बनर्जी ने यह फैसला किया कि 30 सितम्बर और 1 अक्टूबर की रात तक मोहर्रम के जुलूस भी निकलेंगे, इसलिए कोलकाता में दुर्गा महोत्सव के दौरान दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं हो सकेगा। सरकार के इस फैसले का ऐलान ममता ने मीडिया के सामने स्वयं किया। ममता के इस भेदभाव पूर्ण फैसले को ही हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। मालूम हो कि गत वर्ष भी अक्टूबर माह में भी ममता ने ऐसा ही भेदभाव पूर्ण फैसला किया था, अब देखना है कि हाईकोर्ट के फैसले और सरकार के बाद ममता बनर्जी की सरकार क्या रुख अपनाती हैं।लेकिन दीदी का फैसला चाहे जो भी हो,उन्हे जनता और कोर्ट का सम्मान करने भी आना चाहिये।

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