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18 जनवरी पर विशेष : नेताजी के निष्क्रमण दिवस पर धनबाद कें गोमोह के लोगों को रहती है प्रतीक्षा

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धनबाद : नेताजी सुभाष चंद्र बोस का गोमो से पुराना नाता है. गोमोके लोगों को नेताजी के निष्क्रमण दिवस का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता हैइस दिन लोग उनको याद करते हुए हावड़ा पेशावर मेल जो अब कालका मेल के नाम से जानी जाती हैउस ट्रेन में नेताजी की तस्वीर लगाकर, ट्रेन को दुल्हन की तरह सजाकर व ट्रेन के चालक और गार्ड को सम्मानित कर ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना किया जाता है. विदित हो कि 18 जनवरी 1941 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस गोमो में अंतिम बार देखे गए थे.आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अंग्रेजो ने वर्ष 2 जुलाई 1940 में हॉलवेल मूवमेंट के दौरान कोलकाता में गिरफ्तार कर प्रसिडेंसी जेल भेज दिया गया था. अपनी गिरफ्तारी से नाराज होकर नेताजी अनशन पर बैठ गए, जिससे उनकी तबियत खराब हो गई.

कालका मेल: इसी रेलगाड़ी मेंं बैठकर नेताजी पेशावर तक गए थे. file photo

                 अंग्रेजो ने उन्हें इस शर्त पर छोड़ा की स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद फिर से गिरफ्तार कर लिया जाएगा.अंग्रेजो ने नेताजी को छोड़ने के बाद भी एलंगिन रोड स्थित उनके आवास पर पहरा लगा दिया.इसी मामले की सुनवाई 27 जनवरी 1941 को तय थी जिसकी भनक नेताजी को लग गई. सुनवाई के दौरान उन्हें जेल की सजा तय थी.नेताजी को इस मामले की भनक मिलते ही अंग्रेजो की आंखों में धूल झोंककर भागने में सफल रहे. कोलकाता से नेताजी के भागने की खबर मिलते ही अंग्रेजी हुकूमत में खलबली मच गई.इधर नेताजी ने अपने भतीजे शिशिर बोस और अपने परिवार के साथ काले रंग की आस्ट्रिन कार से तोपचांची होते हुए गोमो पहुंचे तथा एक अज्ञात स्थान पहुंचे. उक्त जगह पर आज आजाद हिंद उच्च विद्यालय स्थापित है.नेताजी सुभाष चंद्र बोस 18 जनवरी 1941 को ही गोमो से हॉल मूवमेंट के दौरान ट्रेन पकड़ी थी.

विदेश जाकर नेता जी ने ब्रिटिश से लोहा लेने के लिए आजाद हिन्द फौज बनाया था file photo

           संभवत भारत मे वह फिर नही देखे गए. इस यात्रा को उनकी जीवनी मेंमहानिष्क्रमण दिवस के रूप में जगह दी गई.उनकी यह यात्रा उनके मित्र सत्यव्रत बनर्जी ने बनाई थी. इस यात्रा के बाद नेताजी कभी भी अंग्रेजी हुकूमत के हाथ नही आएं.उनका शेष जीवन का शेष भाग कब और कैसे गुजरा यह लोगों के बीच आज भी एक रहस्य बना हुआ है.नेताजी की याद में गोमो स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक और दो के बीच नेताजी रिसर्च ब्यूरो की मदद से उनकी कांस्य की प्रतिमा स्थापित की गई है.तथा वर्ष 2009 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा गोमो स्टेशन का नाम बदलकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस जंक्शन गोमोह रखा गया था.

पूर्व का गोमो स्टेशन file photo

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