http://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js तत्काल कोटे में सेंध लगाने वाले को दबोचा हैकर ने रेलवे को लगाया करोड़ों का चूना – India News Live-INL NEWS LIVE NETWORK (P)LTD.

तत्काल कोटे में सेंध लगाने वाले को दबोचा हैकर ने रेलवे को लगाया करोड़ों का चूना

रेलवे की वेबसाइट हैक कर तत्काल कोटे में सेंध लगाने वाले हैकर को सीबीआई और रेलवे की विजिलेंस टीम ने लम्बी जांच-पड़ताल के बाद बुधवार रात गिरफ्तार कर लिया। हैकर से सामना होने पर अधिकारी दंग रह गए। उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि महज इंटर पास और 19 साल का हामिद अशरफ यह काम कर सकता है। लेकिन जब उसके कमरे से 17 एटीएम कार्ड, 80 सिम, 10 लैपटाप और 17 बैंक पासबुकों में 50 लाख से अधिक रकम की जानकारी मिली तो उन्हें यकीन हो गया कि जिसकी तलाश थी, यह वही है। करीब दो साल से काला धंधा कर रहा हामिद रेलवे के लिए चुनौती बना हुआ था। उस तक पहुंचने के लिए सीबीआई और विजिलेंस की टीम को तीन महीने लगे। गोपनीय जांच की शुरुआत मुम्बई से हुई। बंगलुरु और लखनऊ होते टीम तीन दिन पहले बस्ती आई। हामिद के बारे में पूरी पड़ताल करने के बाद बुधवार रात करीब दो बजे सीबीआई की मुम्बई, बंगलुरु, मुंबई व लखनऊ के अधिकारियों के अलावा रेलवे विजिलेंस की टीम ने पुरानी बस्ती के दक्षिण दरवाजा क्षेत्र में एक मकान पर छापा मार कर हामिद को दबोच लिया। टीम में सीबीआई बंगलुरु के इंस्पेक्टर राजेश शेखर, सीबाआई लखनऊ के इंस्पेक्टर रमेश पाण्डेय आदि थे। टीम ने करीब तीन घंटे तक वहां जांच-पड़ताल की। कमरे में असंख्य एटीएम कार्ड, सिमकार्ड, पैन कार्ड और 10 लैपटाप देख अधिकारियों की आंखें अचरज से फैल गईं। यह मकान हामिद के मामा नसीम अंसारी का है। हामिद मूल रूप से कप्तानगंज थाने के वायरलेस चौराहा क्षेत्र का रहने वाला है। टीम गुरुवार को उसे लेकर मुम्बई के लिए रवाना हो गई। इंस्पेक्टर पुरानी बस्ती थाना रणधीर मिश्र ने बताया कि जल्द पूरा गैंग गिरफ्त में होगा। करोड़ों का चूना
हामिद ने काले धंधे के लिए अपना साफ्टवेयर बनाया था। उसका नाम ह्यब्लैक केएस था। इसी साफ्टवेयर से वह आईआरसीटीसी की वेबसाइट हैक करता था। यह साफ्टवेयर उसने देश के विभिन्न विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद करीब पांच हजार एजेंटों को दे रखा था। मास्टर सर्वर और मेन पासवर्ड अपने पास रखे था। इन एजेंटों के जरिए ही वह टिकट बुक कराता था और प्रति टिकट अतिरिक्त रकम में से 25 प्रतिशत बतौर कमीशन खुद लेता था। एजेंट यह रकम उसके विभिन्न बैंक खातों में जमा कर देते थे। हर महीने वह करीब 20 लाख रुपए कमाता था।फिल्म से दिखी काली दुनिया की राह : गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले हामिद ने पूछताछ में सीबीआई को बताया कि करीब ढाई साल पहले वह गोरखपुर फिल्म देखने गया था। फिल्म में एक हैकर को बैंक अकाउण्ट हैक कर मिनटों में लाखों-करोड़ों हासिल करते देख काफी प्रभावित हुआ। पिक्चर देखकर बाहर निकला और उसी दिन उसने कम्प्यूटर से जुड़ी आधा दर्जन किताबें खरीदीं। इसके बाद उसने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।ऐशो आराम के लिए उतरा काले धंधे में: ऐशो आराम की जिंदगी जीने के लिए हामिद काले धंधे में उतरा। हाईस्कूल में दो बार फेल हो चुका हामिद बस इंटर पास बताया जा रहा है। इस धंधे में उतरने से पहले उसले दो महीने तक साइबर कैफे में काम किया। उस दौरान कम्प्यूटर से जुड़ी कई किताबें पढ़ उस दुनिया का माहिर बन गया। इसके बाद रेलवे की वेबसाइट हैक करने का साफ्टवेयर तैयार किया। हाल में उसने करीब सवा करोड़ की लग्जरी गाड़ी बुक कराई थी।
सीबीआई मुम्बई, सीबीआई बंगलुरु और सीबीआई लखनऊ समेत रेलवे विजिलेंस की टीम तीन महीने से हामिद के पीछे पड़ी थी। बरामद 80 सिम में से अधिकतर का प्रयोग वह वाट्सअप के लिए के लिए करता था। व्हाट्सअप नम्बर का लोकेशन ट्रेस करते हुए सीबीआई सोमवार को बस्ती पहुंची थी। बुधवार की शाम तक सीबीआई इंस्पेक्टर राजेश्वर शेखर, इंस्पेक्टर रमेश पाण्डेय व अन्य इधर-उधर भटकते रहे। थक हार कर टीम ने इंस्पेक्टर पुरानी बस्ती रणधीर मिश्र से मदद मांगी। देर रात करीब दो बजे एसआई रामगिरीश यादव और अर¨वद कुमार एवं महिला कांस्टेबल प्रीति पाण्डेय के साथ सीबीआई ने एक मकान पर छापा मार कर हामिद को पकड़ा।
हामिद वेबसाइट हैक कर बमुश्किल 30 सेकेण्ड में तत्काल टिकट बना लेता था। करीब दो साल से सक्रिय हामिद के मुताबिक उसे याद नहीं कि वह अब कितने हजार तत्काल टिकट बना चुका है। उसके साफ्टवेयर के लिए दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई, बंगलुरु, कोलकाता, लखनऊ, पटना सहित कई अन्य शहरों के लोग संपर्क करते थे। हामिद के मुताबिक तत्काल कोटे के टिकट के लिए रेलवे काउण्टर और आईआरसीटीसी की वेबसाइट निर्धारित समय ठीक 10.00 बजे सुबह खुलती है। ठीक नौ बजकर उनसठ मिनट पचास सेकेण्ड (9:59:50) पर वह आईआरसीटीसी की वेबसाइट को अपने साफ्टवेयर के जरिए हैक कर लेता था। इसी के साथ देश के विभिन्न कोनों में मौजूद अपने एजेंटों के साफ्टवेयर का भी लॉक खोल देता था। जब तक रेलवे काउण्टर पर क्लर्क और सामान्य लोग आईआरसीटीसी की वेबसाइट खोलते थे, वह दस बजकर दस सेकेण्ड के अंदर ही तत्काल कोटे की ढेर सारी टिकटें हासिल कर लेता था।

Comments

comments

x

Check Also

बिहार के आरा में आतंकियों के कमरे में धमाका; बड़ी साजिश नाकाम, 4 हुए फरार

  आरा ၊ बिहार के आरा जिले में एक बड़ी आतंकी साजिश नाकाम हो गई है. यहां के हरखेन कुमार ...